कार बीमा सारी जानकारी जो आपको जांनना जरूरी है

अगर आप नई कार या बाइक खरीदना चाहते हैं या फिर अपने वाहन के इंश्योरेंस को रिन्यू कराना चाहते हैं तो आप इन विभिन्न ऑप्शंस को आजमा सकते हैं।

भारत में कार को कुछ वर्षों पहले तक लग्जरी से जोड़कर देखा जाता था। हालांकि, अब ऐसा नहीं है। अब सड़क पर चारों तरफ कारें ही कारें दिख जाएंगी। लेकिन, इन कारों की बढ़ती संख्या के साथ ही भारतीय की कई खस्ताहाल सड़कों पर इनको ड्राइव करना किसी रिस्क से कम नहीं है। कारों की कंडिशन इनपर ड्राइव करते हुए खराब होती जाती है। ऐसे में कारों के इंश्योरेंस में भी तेजी देखने को मिली।

भारत में होने वाले नॉन लाइफ इंश्योरेंस की कुल प्रीमियम का लगभग 45 पर्सेंट हिस्सा मोटर इंश्योरेंस के खाते में जाता है। यहां मोटर इंश्योरेंस का मतलब उन कारों, दुपहिया वाहनों और कमर्शल वाहनों से है जो रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के तहत रजिस्टर्ड हैं।

कई डीलर वाहन खरीदते वक्त ही इंश्योरेंस कर देते हैं। भारत में 25 नॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां हैं जिनके आॅफिस देशभर में हैं और ये सभी मोटर इंश्योरेंस बेचती हैं। इनके लगभग 3,50,000 एजेंट हैं। अब आनलाइन इंश्योरेंस खरीदने की भी सुविधा है जिसका लाभ कंपनी की वेबसाइट पर डायरेक्ट जाकर उठाया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में मोटर पॉलिसीज कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से खरीदी जा सकती हैं।

अगर आप नई कार या बाइक खरीदना चाहते हैं या फिर अपने वाहन के इंश्योरेंस को रिन्यू कराना चाहते हैं तो आप इन विभिन्न आप्शंस को आजमा सकते हैं।

1. थर्ड पार्टी इंश्योरेंस
रोड पर आने से पहले हर वाहन के लिए यह अनिवार्य है। इसके पीछे यह तर्क है कि अगर आपके वाहन से किसी थर्ड पर्सन का ऐक्सिडेंट होता है तो उसको हर्जाना मिलना चाहिए। मोटर वीइकल्स ऐक्ट में थर्ड पार्टी इंजरी और डैमेज को इंश्योर कराना अनिवार्या है। वाहन के डैमेज का इंश्योरेंस कवर कितना हो, यह कस्टमर पर निर्भर करता है।

2. कॉम्प्रेहेन्सिव इंश्योरेंस कवर
इस पॉलिसी में वाहन के डैमेज होने के साथ ही ऐक्सिडेंट में चोटिल या घायल होने वाली थर्ड पार्टी के प्रति जिम्मेदारी कवर होती है। इतना ही नहीं, इसमें बीमा कराने वाले के वाहन का भी इंश्योरेंस होता है। इसमें ऐक्सिडेंट, आग, चोरी, प्राकृतिक आपदा या आतंकवाद की चपेट में आने वाले वाहनों का इंश्योरेंस होता है।

3. जीरो डेप्रिसिएशन इंश्योरेंस कवर
इस पॉलिसी के तहत गाड़ी की वैल्यू तय करने में डेप्रिसिएशन को शामिल नहीं किया जाता है। इससे अगर किसी हादसे या अन्य वजह से आपकी गाड़ी को नुकसान पहुंचता है तो बीमा कंपनी दावे की पूरी रकम का भुगतान करती है। जीरो डेप कवर का प्रीमियम सामान्य कार बीमा से करीब 20 फीसदी तक महंगा हो सकता है।

कैसे क्लेम करें इंश्योरेंस?
मोटर इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी के तहत थर्ड पार्टी क्‍लेम और आॅन डैमेज क्‍लेम होते हैं। अगर आपके वाहन से ऐक्‍सीडेंट हो जाता है और कोई अन्य व्‍यक्ति इसमें घायल या उसके वाहन को नुकसान होता है तो यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में कवर होता है।

वहीं आॅन डैमेज क्लेम में आपके खुद के वाहन का डैमेज कवर शामिल होता है। ऐक्सिडेंट में आपको या आपके वाहन को नुकसान होता है तो आपको बीमा कंपनी और पुलिस को ऐक्सिडेंट की जानकारी देनी होती है।

इंश्योरर कस्टमर को क्लेम करने के कई माध्यम देता है। इसमें इंश्योरेंस करने वाली कंपनी के कस्टमर कॉन्टैक्ट सेंटर, मेसेज या उसकी वेबसाइट के जरिए क्लेम के लिए अप्लाई किया जा सकता है।

अगर गाड़ी बुरी तरह डैमेज है तो इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से नियुक्त किया जाने वाला सर्वेयर इसका सर्वे करेगा। यह वर्कशॉप के एस्टिमेट के हिसाब से तैयार किया जाएगा। कम डैमेज वाले केसेज में इंश्योरेंस कंपनी के आॅफिशल भी चेक कर सकते हैं। कई इंश्योरेंस कंपनियों का वर्कशॉप्स से टाईअप होता है जहां आप अपनी डैमेज कार या बाइक को कैशलेस बनवा सकते हैं।

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