स्टॉक्स में निवेश के 5 जरूरी टिप्स

1. अपनी भावनाओं की जाँच करें।

बाजार की अस्थिरता के दौरान दरवाजे पर अपनी भावनाओं की जाँच करें

अस्थिर बाजार निवेशकों के बीच भय और चिंता की भावनाओं को प्रेरित कर सकते हैं। बाजार में जो उछाल और तंगी आई है, वह किसी भी कारण से हो सकती है- व्यापार नीति की चिंता, कर टूटना, मुद्रास्फीति की आशंका, आर्थिक आशावाद, वैश्विक महामारी की चिंता या मंदी की घड़ी। इन परिस्थितियोँ मे हमे सूझबूझ और प्रोफेसनल्स की तरह व्यव्हार करना चाहिए।इससे पहले कि आप अपने निवेश के संबंध में कोई निर्णय लें, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपनी भावनाओं को जांच में रखें और समझो क्या चल रहा है। 

2.  कंपनियां चुनें, स्टॉक नहीं।

याद रखें: किसी कंपनी के शेयर का हिस्सा खरीदना आपको उस व्यवसाय का एक हिस्सा बनाता है।स्टॉक पर रिसर्च करना कार के लिए खरीदारी करने जैसा है। आप तकनीकी चश्मे पर पूरी तरह से निर्णय ले सकते हैं, लेकिन यह विचार करना भी महत्वपूर्ण है कि सवारी सड़क पर कैसा महसूस करती है।

एक मशहूर कहावत है-सभी अंडे एक ही टोकरी में ना रखें. निवेश में भी यह फार्मूला बिल्कुल फिट बैठता है. आपको निवेश के हिसाब से अलग अलग कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए. अगर आप अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के शेयर में निवेश करें तो यह पोर्टफोलियो आपको जोखिम से बचाने में मदद कर सकता है. इसकी वजह यह है कि अगर किसी अवधि में कुछ स्टॉक अच्छा प्रदर्शन नहीं करते तो बाकी सेक्टर की कंपनियां अच्छे परिणाम दे सकती हैं. किसी निश्चित सीमा तक स्टॉक की संख्या में बढ़ोतरी आनुपातिक रूप से जोखिम को बांटने में मदद करती है.

3.  पैनिक बार के लिए आगे की योजना बनाएं।

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो अपने निवेश का नजरिया कम से कम पांच साल का रखें. इसकी वजह यह है कि निवेश जितनी लंबी अवधि का होगा, उसमें जोखिम उतना ही कम होगा. लंबी अवधि में किसी कंपनी की कार्य क्षमता और कुशलता बढ़ने की पूरी संभावना होती है.

आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकते. आप उसके हिसाब से निवेश करने या भुनाने का फैसला जरूर कर सकते हैं.

अगर आपके निवेश में कमजोरी आ रही है तो इसे नियंत्रित करने का ही एक टूल है स्टॉप लॉस. मान लीजिये कि आपने किसी शेयर को इस उम्मीद में खरीदा कि यह 100 रुपये से बढ़कर एक महीने में 110 रुपये का हो जायेगा.

उसमें कमजोरी आने लगी तो आप उसके लिए 95 रुपये का स्टॉप लॉस सेट कर सकते हैं. इससे आपके जोखिम का प्रबंधन होता है. आपका नुकसान एक सीमित दायरे में ही रह जाता है.

4.  कम से कम जोखिम वाले अपने स्टॉक का निर्माण करें।

स्टॉक को दीर्घकालिक निवेश माना जाता है क्योंकि वे काफी जोखिम उठाते हैं; आपको किसी भी उतार-चढ़ाव के मौसम के लिए समय चाहिए और दीर्घकालिक लाभ से लाभ होगा। इसका मतलब है कि कम से कम अगले पांच सालों में शेयरों में निवेश करना सबसे अच्छा होगा।

शेयरों की पसंद के समय सावधानी बरतनी चाहिए, और कुछ ध्यान रखना चाहीए जैसे कि समय सीमा  जिसमें हम एक विशेष राशि निवेश करना चाहते हैं, लाभांश उपज, उद्योग, समग्र समष्टि आर्थिक और सूक्ष्म आर्थिक स्थितिआं, हमारी जोखिम लेने की भूख।

अगर हम अधिक जोखिम ले सकते हैं, तो बड़े रिटर्न या बड़े नुकसान की संभावना इसके साथ आती है। इसी तरह, कम जोखिम के साथ, रिटर्न प्रतिशत भी तदनुसार कम हो जाता है। तो, बुद्धिमानी से योजना बनाएं और बुद्धिमानी से अपने स्टॉक चुनें।

5.  ट्रेडिंग ओवरएक्टिविटी से बचें।

ट्रेडिंग एक्टिविटी धीरे-धीरे पदों का निर्माण करके जोखिम कम किया जा सकता है।शायद ही कभी अल्पकालिक शोर (सुर्खियां, अस्थायी कीमत में उतार-चढ़ाव) प्रासंगिक है कि एक अच्छी तरह से चुनी गई कंपनी लंबी अवधि में कैसे प्रदर्शन करती है। यह निवेशकों के शोर पर प्रतिक्रिया करता है जो वास्तव में मायने रखता है। इसीलिए ओवेरक्टिविटी हमेशा नुकसानदायक होता है और इससे ब्रोकरेज ही अधिक लगता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *